Monday, January 20, 2020

दलित साहित्य की चर्चित प्रेम कहानियां

दलित साहित्य की चर्चित प्रेम कहानियां
संपादक- कैलाश चंद चौहान

पृष्ठ संख्या : 240
मूल्य : 180 रुपये


इस संग्रह की कहानियों को पढ़कर महसूस होता है कि दलित लेखक केवल उत्पीड़न की कहानियां ही नहीं लिख रहे हैं, बल्कि प्रेम जैसे विषय को भी छू रहे हैं. यही नहीं, प्रेम पर विभिन्न दृष्टिकोण से लिखकर दलित साहित्य को समृद्वभी कर रहे हैं. दलित प्रेम-कहानियां समाज की केवल उन विकृतियों को नहीं छूती कि एक दलित लड़के या लड़की ने गैर दलित से प्रेम किया, उससे शादी के लिए बहुत संघर्ष किया,  विपरीत जाति के कारण उनकी शादी नहीं हो पाई. गैर दलितों ने दलितों पर अत्याचार किया. दलित प्रेम-कहानियां प्रेम व मानवीय कमजोरियों को अलग-अलग पहलुओं से समाज की नब्ज को पकड़ते हुए रेखांकित भी करती हैं. जो उच्च जातीय घमंड में डूबे लेखक दलित लेखकों की आधी-अधूरी रचनाएं पढ़कर शोर मचाकर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं कि दलित साहित्य केवल गैर दलितों द्वारा दलितों पर अत्याचार रेखांकित करने का साहित्य है, बस यह अपनी रचनाओं में हाय मर गए, मार दिया ही करते रहते हैं, उन्हें इस संग्रह की कहानियों को पढ़ना चाहिए. इन कहानियों में मानवीय संवेदनाओं की गहराई भी नजर आएगी.

इस पुस्तक में शामिल रचनाकार हैं-
1.डा. सुशीला टाकभौरे, 2.कावेरी ,3.रत्नकुमार सांभरिया , 4. मोहनदास नैमिशराय , 5.डा.अजय नावरिया , 6.प्रो.हेमलता महिश्वर , 7. कैलाश वानखेड़े , 8. अनिता भारती , 9. विपिन बिहारी, 10. डा. पूरन सिंह, 11. चंद्रकांता , 12. कैलाश चंद चौहान , 13. प्रियंका शाह , 14. हीरालाल राजस्थानी, 15. सूरज बड़त्या , 16. डा. पूनम तुषामड़ 17. राज वाल्मीकि , 18. बी.एस. आनन्द
प्रेम कहानियों पर विशेष आलेख :
 1. प्रेम वर्जित क्षेत्र नहीं है: जयप्रकाश कर्दम , 2. दलित प्रेम कहानी का आशय: बजरंग बिहारी तिवारी, 3. दलित लेखन की प्रेम विषयक कहानियां: डा.गुलाब सिंह


यह यह कहानी संग्रह  यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं-
https://www.amazon.in/Dalit-Sahitya-Charchit-Kahaniya-Hindi/dp/8194145643/ref=sr_1_3?keywords=kailash+Chand+Chauhan&qid=1579525054&sr=8-3


कैलाश चंद चौहान का उपन्यास 'विद्रोह'

उपन्यास :  विद्रोह
पृष्ठ संख्या : 176
मूल्य : 120 रुपये


कैलाश चंद चौहान उन उपन्यासकारों  में हैं, जिन्होंने बहुत कम समय में उपन्यास लेखन में स्वयं को स्थापित किया है. जो लेखन को न केवल जीवन का पर्याय मानते हैं, बल्कि अपने आस-पास घटित होने वाली प्रत्येक घटना- परिघटना के प्रति सतर्क, जागरुक एवं चेतनाशील भी रहते हैं. वे इन्हें बड़ी ही सहजता से अपनी रचनाओं के कलेवर में पिरोना जानते हैं. उनके द्वारा रचित उपन्यास ‘विद्रोह’ इसकी जीवंत मिसाल है.
यह उपन्यास दो पीढ़ियों के मध्य उपजे साकारात्मक संघर्ष की प्रक्रिया और उसके परिणाम को दर्शाने में सफल रहा है. जिसे उपन्यास के नायक विक्रम के पारिवारिक, सामाजिक एवं राजनैतिक घटनाक्रमों द्वारा समझा जा सकता है, जो एक पढ़ा-लिखा सुशिक्षित, सफल व्यक्ति होने के बावजूद भी अपने ही सहकर्मियों की जातीय निंदा और द्वेष का शिकार होता है.किन्तु इन सब से हताश निराश होने की बजाय वह और अधिक शक्ति एवं ऊर्जावान व्यक्तित्व के रूप में सामने आता है.
कैलाश जी द्वारा रचित उपन्यासों की यह विशेषता रही है कि उनके उपन्यासों की स्त्री पात्र अपने मुखर रूप में सामने आती हैं. ‘विद्रोह’ की असल पात्र तो स्त्रियां ही हैं, फिर चाहे वह अंतर्जातीय विवाह एवं प्रेम के लिए संघर्ष करती प्रियंका हो,ससुराल में अंधविश्वास के खिलाफ मुखर विरोध करती पूजा हो या जाति छुपाकर जीते कथित पढ़े-लिखे कहलाने वाले राघव के प्रेम को नकारने वाली स्वाभिमानी सुलेखा हो या अंजली. ये सभी पात्र अपने अपने किरदार में बहुत सटीक भूमिका में अवतरित होते हैं.
अतः ‘विद्रोह’ में स्त्री विमर्श खुलकर सामने आया है, अन्धविश्वास की शिकार ज्यादातर महिलाओं को दिखाया जाता है किन्तु यहां एक महिला ही उसका खुलकर विरोध करती है, कुल मिलाकर ये सभी पात्र उपन्यास को अधिक पठनीय और प्रासंगिक एवं रोचक बनाते हैं.

दलित साहित्य की चर्चित प्रेम कहानियां

दलित साहित्य की चर्चित प्रेम कहानियां संपादक- कैलाश चंद चौहान पृष्ठ संख्या : 240 मूल्य : 180 रुपये इस संग्रह की कहानियों को पढ़कर ...