दलित साहित्य की चर्चित प्रेम कहानियां
संपादक- कैलाश चंद चौहान
पृष्ठ संख्या : 240
मूल्य : 180 रुपये
इस संग्रह की कहानियों को पढ़कर महसूस होता है कि दलित लेखक केवल उत्पीड़न की कहानियां ही नहीं लिख रहे हैं, बल्कि प्रेम जैसे विषय को भी छू रहे हैं. यही नहीं, प्रेम पर विभिन्न दृष्टिकोण से लिखकर दलित साहित्य को समृद्वभी कर रहे हैं. दलित प्रेम-कहानियां समाज की केवल उन विकृतियों को नहीं छूती कि एक दलित लड़के या लड़की ने गैर दलित से प्रेम किया, उससे शादी के लिए बहुत संघर्ष किया, विपरीत जाति के कारण उनकी शादी नहीं हो पाई. गैर दलितों ने दलितों पर अत्याचार किया. दलित प्रेम-कहानियां प्रेम व मानवीय कमजोरियों को अलग-अलग पहलुओं से समाज की नब्ज को पकड़ते हुए रेखांकित भी करती हैं. जो उच्च जातीय घमंड में डूबे लेखक दलित लेखकों की आधी-अधूरी रचनाएं पढ़कर शोर मचाकर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं कि दलित साहित्य केवल गैर दलितों द्वारा दलितों पर अत्याचार रेखांकित करने का साहित्य है, बस यह अपनी रचनाओं में हाय मर गए, मार दिया ही करते रहते हैं, उन्हें इस संग्रह की कहानियों को पढ़ना चाहिए. इन कहानियों में मानवीय संवेदनाओं की गहराई भी नजर आएगी.
इस पुस्तक में शामिल रचनाकार हैं-
1.डा. सुशीला टाकभौरे, 2.कावेरी ,3.रत्नकुमार सांभरिया , 4. मोहनदास नैमिशराय , 5.डा.अजय नावरिया , 6.प्रो.हेमलता महिश्वर , 7. कैलाश वानखेड़े , 8. अनिता भारती , 9. विपिन बिहारी, 10. डा. पूरन सिंह, 11. चंद्रकांता , 12. कैलाश चंद चौहान , 13. प्रियंका शाह , 14. हीरालाल राजस्थानी, 15. सूरज बड़त्या , 16. डा. पूनम तुषामड़ 17. राज वाल्मीकि , 18. बी.एस. आनन्द
प्रेम कहानियों पर विशेष आलेख :
1. प्रेम वर्जित क्षेत्र नहीं है: जयप्रकाश कर्दम , 2. दलित प्रेम कहानी का आशय: बजरंग बिहारी तिवारी, 3. दलित लेखन की प्रेम विषयक कहानियां: डा.गुलाब सिंह
यह यह कहानी संग्रह यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं-
https://www.amazon.in/Dalit-Sahitya-Charchit-Kahaniya-Hindi/dp/8194145643/ref=sr_1_3?keywords=kailash+Chand+Chauhan&qid=1579525054&sr=8-3
संपादक- कैलाश चंद चौहान
पृष्ठ संख्या : 240
मूल्य : 180 रुपये
इस संग्रह की कहानियों को पढ़कर महसूस होता है कि दलित लेखक केवल उत्पीड़न की कहानियां ही नहीं लिख रहे हैं, बल्कि प्रेम जैसे विषय को भी छू रहे हैं. यही नहीं, प्रेम पर विभिन्न दृष्टिकोण से लिखकर दलित साहित्य को समृद्वभी कर रहे हैं. दलित प्रेम-कहानियां समाज की केवल उन विकृतियों को नहीं छूती कि एक दलित लड़के या लड़की ने गैर दलित से प्रेम किया, उससे शादी के लिए बहुत संघर्ष किया, विपरीत जाति के कारण उनकी शादी नहीं हो पाई. गैर दलितों ने दलितों पर अत्याचार किया. दलित प्रेम-कहानियां प्रेम व मानवीय कमजोरियों को अलग-अलग पहलुओं से समाज की नब्ज को पकड़ते हुए रेखांकित भी करती हैं. जो उच्च जातीय घमंड में डूबे लेखक दलित लेखकों की आधी-अधूरी रचनाएं पढ़कर शोर मचाकर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं कि दलित साहित्य केवल गैर दलितों द्वारा दलितों पर अत्याचार रेखांकित करने का साहित्य है, बस यह अपनी रचनाओं में हाय मर गए, मार दिया ही करते रहते हैं, उन्हें इस संग्रह की कहानियों को पढ़ना चाहिए. इन कहानियों में मानवीय संवेदनाओं की गहराई भी नजर आएगी.
इस पुस्तक में शामिल रचनाकार हैं-
1.डा. सुशीला टाकभौरे, 2.कावेरी ,3.रत्नकुमार सांभरिया , 4. मोहनदास नैमिशराय , 5.डा.अजय नावरिया , 6.प्रो.हेमलता महिश्वर , 7. कैलाश वानखेड़े , 8. अनिता भारती , 9. विपिन बिहारी, 10. डा. पूरन सिंह, 11. चंद्रकांता , 12. कैलाश चंद चौहान , 13. प्रियंका शाह , 14. हीरालाल राजस्थानी, 15. सूरज बड़त्या , 16. डा. पूनम तुषामड़ 17. राज वाल्मीकि , 18. बी.एस. आनन्द
प्रेम कहानियों पर विशेष आलेख :
1. प्रेम वर्जित क्षेत्र नहीं है: जयप्रकाश कर्दम , 2. दलित प्रेम कहानी का आशय: बजरंग बिहारी तिवारी, 3. दलित लेखन की प्रेम विषयक कहानियां: डा.गुलाब सिंह
यह यह कहानी संग्रह यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं-
https://www.amazon.in/Dalit-Sahitya-Charchit-Kahaniya-Hindi/dp/8194145643/ref=sr_1_3?keywords=kailash+Chand+Chauhan&qid=1579525054&sr=8-3

